क्रिकेटः रिश्तों पर मरहम

 

सामंतवादी ग्रीक राज्य के लोग जब खेलों में भागीदारी करने के लिए ओलंपिया कस्बे में जमा हुए तो पहली बार उन्हें महसूस हुआ कि उनके बीच काफी समानता है. जबकि उनके शासकों ने उन्हें हमेशा ही भड़काया तथा एक दूसरे के खिलाफ नारे बुलंद किए.

यह घटना बहुत साल पहले की है जहां खेलों ने लोगों को ऐसा प्लेटफार्म दिया जिससे पड़ोसियों के बीच युद्धविराम का माहौल बन गया. ओलंपिक खेलों में प्रतिभागियों की भावनाएं प्रतिस्पर्धा से जुड़ गईं जहां घृणा व विद्वेष का कोई स्थान नहीं था.

पुराने अभिलेख बताते हैं कि इन खेलों के समय औरतों में काफी उत्साह देखा जाता था जबकि उन्हें इसे देखने पर प्रतिबंध था. प्रतिबंधों के बावजूद वे अपने को रोक नहीं पाती और पुरुषों के कपड़े पहनकर इन खेलों का आनंद उठाती थीं. ग्रीक शासन ने उनके साथ लगभग तालिबानों जैसा व्यवहार किया.

ओलंपिक खेलों जैसा ही माहौल तब देखने को मिलता है जब भारत और पाकिस्तान की टीमें आमने सामने होती हैं. इन खेलों में गहरे प्रतिस्पर्धात्मक मैचों के कारण लंबे समय से चली आ रही कटुता को लोग भूल रहे हैं. दोनों देशों के बीच में चल रहे मुकाबलों में इस बार पाकिस्तान का अधिक उदार रुख देखने को मिला है.

पाकिस्तान के रेस्तराओं ने भारतीयों को बिल परोसने से परहेज किया. मेहमानवाजी की कुछ ऐसी ही तहजीब पिछले साल दिखी जब पाकिस्तान टिम के दौरे पर भारतीयों ने ऐसी ही उदारता दिखायी थी. यह मसला प्रचार माध्यमों के कारण काफी प्रसार पाया. भारतीयों के लिए पाकिस्तान पहले की तरह अब अछूता देश नहीं रह गया है. अधिक समय तक यह जुनूनी मुल्ला‌ओं का देश नहीं रह सकता. जाहिर है बहुत से पाकिस्तानी भी भारत को दूसरी नजर से देखते होंगे.

दोनों ही देशों को एक दूसरे की संस्कृति को लेकर काफी उत्साह है और यह पिछले कुछ दिनों का ही परिणाम है. दोनों तरफ से बुद्धिजीवी लोगों ने इसमें जागरुकता दिखाई है. यदि दोनों ही पड़ोसी अपने धन को सैनिक साजो सामान खरीदनें में न बर्बाद करें तो दक्षिण एशिया का तेजी से विकास संभव है. पिछले दिनों अधिक से अधिक लोगों का आपस में मिलने से इस प्रकार की भावना का विकास हुआ है. इसमें कोई संदेह नहीं कि दोनों ही देशों को इसे विदेशनीति के तौर पर अपनाना चाहिए.

दोनों देशों के राजनयिक अधिक समय तक आतंकवादी हमलों का रोना नहीं रो सकते. भारत के अधिकारी पाकिस्तान के दावों को समायोजित करने में लगे रहते हैं कि कश्मीर में आतंकवादी हमले का उनकी खुफिया एजेंसी से कोई लेना देना नहीं है.

उनका कहना है कि यह लश्कर ए तैयव्बा द्वारा किया जा रहा है जो दक्षिण एशिया में इस्लामिक शासन स्थापित करने के लिए आतंकवाद का सहारा ले रहे हैं. कश्मीर मामले का हल अपने रास्ते पर है और शांति प्रक्रिया अधिक विधिसंगत हो गई है.

दोनों पड़ोसियों के बीच बढ़ रहे सौहार्द्र पर यदि जुनूनी मुल्ला और धार्मिक साधू हायतौबा नहीं मचाते हैं तो इससे स्पष्ट है कि विरेंद्र सहवाग, इंजमामुल हक, सचिन तेंदुलकर और शोएब अख्तर और दूसरे क्रिकेटर इस उपमहाद्वीप को अपने शानदार प्रदर्शन के आधार पर प्रभावित कर सकते हैं.

दोनों तरफ के दर्शको में खेल के जुनून ने मुल्लाओं और हिंदू साधुओं के लिए समस्या खड़ा कर दिया है. कूटनीतिज्ञ और आलोचक इससे सहमत नहीं हो सकते लेकिन रिश्तों में मोड़ उस समय आया जब दोनों तरफ के क्रिकेट खिलाड़ियों ने वर्ष २००४ में लाहौर और करांची में अपने खेल से चारो ओर के माहौल को बदल दिया.

जनरल परवेज मुशर्रफ पाकिस्तान में विरोधी रवैये के लिए दोषी हैं लेकिन सत्यता यह है कि दोनों तरफ के लोग राजनीतिज्ञों के अंधेरगर्दी के विपरीत अपने जीवन और भविष्य को संवारने के लिए उत्सुक हैं.

वर्तमान में जो सीरीज चल रही है उसमें लोगों में उतना उत्साह नहीं दिख रहा है जितना वर्ष २००४ में था. लेकिन यह सीरीज कुछ मामलों में काफी महत्वपूर्ण है. ये मैच ऐसे माहौल में खेले जा रहे हैं जहां मारपीट व कटुता की कोई जगह नही है.

यह उसी तरह है जैसे कि भारत, पाकिस्तान या श्रीलंका के साथ खेल रहा हो. यह महत्वपूर्ण परिवर्तन है और इससे यह साबित होता है कि दोनो देशों के रिश्ते नए आयाम ले रहे हैं. सीमा के आर पार बसों का आवागमन हो रहा और रेलगाड़ी सेवाओं का विकास हो रहा है. आने वाले दिनों में दोनों पड़ोसियों के बीच व्यापारिक सौदा बढ़ सकता है क्योंकि इस क्षेत्र का क्षेत्रीय समंवय का ग्राफ तेजी से उपर चढ़ रहा है. इसका श्रेय दोनो देशों के बीच क्रिकेट को जाता है जो ओलंपिक की तरह ही वास्तविक स्पिरिट के साथ खेला जाता है.

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